लघु और मझौले उद्यमों (एसएमई) के लिए ऋण पुनर्गठन प्रणाली


बैंक द्वारा लघु और मझौले उद्यमों को ऋण के प्रवाह में सुधार के लिए, एसएमई क्षेत्र की इकाइयों के लिए एक ऋण पुनर्गठन प्रणाली क्रियान्वित की गई है जो कि निम्‍नानुसार है:

 मुख्‍य बातें

क) एसएमई की परिभाषा

एसएमई की परिभाषा आरपीसीडी के दिनांक 19 अगस्‍त, 2005 के परिपत्र सं0 आरपीसीडी. पीएलएफएनएस.बीसी.31/2005-06  में निम्‍नानुसार दी गई है।
“वर्तमान में, एक छोटे पैमाने पर औद्योगिक इकाई एक ऐसा उपक्रम है जि‍समें होजरी , हाथ उपकरण , दवाओं और दवाइयों , स्टेशनरी आइटम और खेल के सामान के तहत कुछ निर्दिष्ट मदें जिसमें, यह निवेश सीमा रुपये 5 करोड़ तक बढ़ाई गई है, को छोड़कर, संयंत्र और मशीनरी में 1 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश  नहीं होना चाहिए। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए लघु उद्योग से बदलाव के लिए एक व्यापक कानून संसद के विचाराधीन है। उपरोक्‍त कानून के लंबित अधिनियम के अंतर्गत  मौजूदा लघु उद्योग/छोटे उद्योगों की परिभाषा जारी रहेगी।  संयंत्र और मशीनरी में एसएसआई सीमा से अधिक रुपए 10 करोड़ तक के निवेश की इकाइयों को मध्यम इकाई माना जाएगा। “


ख)पात्रता मानदंड

(i) ये निर्देश निम्नलिखित संस्थाओं, पर लागू होंगे जो व्यवहार्य या संभावित रूप से व्यवहार्य हों:

     क) बैंक को देय राशि के स्तर पर ध्यान दिए बिना सभी गैर कॉर्पोरेट लघु और मझौले उद्यम (एसएमई)
     ख) बैंक को देय राशि के स्तर पर ध्यान दिए बिना सभी कॉर्पोरेट एसएमई, जो कि एक ही बैंक से, बैंकिंग सुविधाओं का आनंद ले रहे हों।  
     ग) सभी कॉर्पोरेट एसएमई, जो  एकाधिक/संघ बैंकिंग व्यवस्था के तहत 10 करोड़ रुपये तक वित्‍त पोषित और गैर वित्त पोषित हों (10 करोड़ रुपये और उससे ऊपर के बकाया के लिए दिशा निर्देश अलग से जारी किए गए हैं)

(ii) इरादतन डिफ़ॉल्टर, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े खाते, इन दिशा निर्देशों के तहत पुनर्गठन के लिए पात्र नहीं होंगे।

(iii) बैंक द्वारा वर्गीकृत "घाटे वाली आस्तियां" पुनर्गठन के लिए पात्र नहीं होंगी।  
(iv) बीआईएफआर मामलों में पैकेज को लागू करने के लिए बीआईएफआर से अनुमोदन प्राप्त करने से पहले बैंक को सभी औपचारिकताओं को पूरा करना सुनिश्चित कर लेना चाहिए।

ग) व्यवहार्यता मापदंड

पुनर्गठन के लिए विचारणीय इकाइयां व्यवहार्य या 7 साल में व्यवहार्य हो जानी चाहिए और पुनर्गठन ऋण चुकाने की अवधि 10 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।  व्यवहार्यता स्थापित करने के लिए तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन एक घर समूह द्वारा किया जाना चाहिए।  

घ) प्रक्रिया

(i) उधारकर्ता इकाइयों से इस आशय का एक अनुरोध प्राप्त होने पर पुनर्गठन किया जाएगा।
(ii) पात्र एसएमई के मामले में, जो संघ/बहु बैंकिंग व्यवस्था के तहत हो,यदि हमारे बैंक की बकाया अधिकतम हो, तो उसको बैंक की दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदारी के साथ पुनर्गठन पैकेज का काम करना होगा।
(iii) उपर्युक्त दिशा निर्देशों को भावी प्रभाव से लागू किया जाएगा।

पुनर्गठन/पुनर्निर्धारण के संबंध में निर्णय बैंक के सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाएगा और अंतिम होगा।