शिक्षा ऋण योजना

1. पात्रता मानदंड:
 
(i) छात्र पात्रताः
 
  • छात्र को भारतीय होना चाहिए।
  • भारत या विदेश में व्यावसायिक/तकनीकी पाठ्यक्रम में प्रवेश परीक्षा/मैरिट प्रक्रिया के आधार पर दाखिला प्राप्त किया हो।
(ii) पात्र पाठ्यक्रमः
 

(a) भारत में अध्ययनः (सांकेतिक सूची)

 
  • ग्रेजुएट पाठ्यक्रमः बी.ए., बी.काम, बी.एस.सी. आदि।.
  • पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमः मास्टर्स एवं पीएचडी।.
  • व्यावसायी पाठ्यक्रमः इंजीनियरिंग, मेडिकल, कृषि, पशु-चिकित्सा, विधि, डेंटल, प्रबंधन, कंप्यूटर आदि।
  • आई.सी.डब्लू.ए., सी.ए., सी.एफ.ए. आदि जैसे पाठ्यक्रम।
  • इलौक्ट्रोनिक्स विभाग से मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित संस्थानों या विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त संस्थानों के कंप्यूटर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम।
  • आईआईएम, आईआईटी, आईआईएससी, एक्सएलआरआई, एनआईएफटी आदि।
  • प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालय द्वारा भारत में प्रस्तावित पाठ्यक्रम।
  • अनुमोदित संस्थाओं के सायंकालीन पाठ्यक्रम।
  • यू.जी.सी./सरकार/एआईसीटीई/एआईबीएमएस/आईसीएमआर आदि द्वारा अनुमोदित कॉलिजों/विश्वविद्यालयों से परिचालित अन्य डिप्लोमा/डिग्री पाठ्यक्रम।
  • राष्ट्रीय संस्थानों एवं अन्य प्रतिष्ठित निजी संस्थाओं द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रम।
  • शिक्षा ऋण हेतु नर्सिंग पाठ्यक्रम/टीचर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम/बी.एड. पात्र होंगे बशर्ते प्रशिक्षण संस्थान केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हो और प्रशिक्षण से डिग्री या डिप्लोमा की प्राप्ति   होगी और मात्र प्रमाणीकरण पाठ्यक्रम नही होगा। इसका शुल्क स्वरूप, केंद्रीय/राज्य सरकार के कॉलिजों में विनिर्दिष्ट स्वरूप के अनुरूप होगा।.
  (b) विदेशो में अध्ययनः 
 
  • ग्रेजुएशनः  प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों द्वारा नौकरी उन्मुख व्यवसायिक/तकनीकी पाठ्यक्रम।
  • पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमः एमसीए, एमबीए, एमएस आदि।
  • सीआईएमए-लंदन एवं सीपीए-यूएसए आदि द्वारा परिचालित पाठ्यक्रम।
  • अनुमोदित विदेशी संस्थानों/विश्वविद्यालयों द्वारा डिप्लोमा पाठ्यक्रम।
(iii) कुशलता विकास अध्ययन पाठ्यक्रमः
 

संबंधित आंचलिक कार्यालयों द्वारा विशेष रूप से अधिकृत शाखाओं/संस्वीकृति प्राधिकारियों द्वारा केवल निम्न पाठ्यक्रमों हेतु शिक्षा ऋण स्वीकृत किए जा सकते हैः

 
  • प्राधिकृत सक्षम स्थानीय एविएशन /शिपिंग प्राधिकारी (भारत एवं विदेश) द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं से एयरानोटिकल एवं शिपिंग की नियमित डिग्री/डिप्लोमा पाठ्यक्रम।
  • अनुमोदित तथा प्रतिष्ठित संस्थाएं से व्यावसायिक पायलेटों/एयरहोस्टों हेतु मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम।
  • मान्यता प्राप्त तथा प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रस्तावित व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं कुशलता विकास अध्ययन पाठ्क्रम (पूर्ण कालिक एवं अंशकालिक)।
  • आंचलिक प्रबंधक इन पाठ्यक्रमों हेतु एक या दो शाखाओं को प्राधिकृत कर सकते हैं।
(iv) पाठ्यक्रम सम्मिलित नहीः पत्राचार पाठ्यक्रम पात्र नही है।
   
(v) प्रधान कार्यालय द्वारा भावी संभावनाओं/संस्थाओं द्वारा मान्यता प्राप्त नए पाठ्क्रमों को योजना में जोड़ा जा सकता है।
2. ऋण राशि:
  माता-पिता/छात्र की अदायगी क्षमता के अनुसार आवश्यकता आधारित ऋण होगा जिसकी निम्न सीमा होगी।
 
भारत में अध्ययन हेतु - अधिकतम रू. 10 लाख
विदेश में अध्ययन हेतु - अधिकतम रू. 20 लाख
  वित्त पोषण हेतु पात्र व्ययः कॉलिज/स्कूल/हॉस्टल/किताबों का क्रय/यंत्र/यूनीफार्म/यात्रा व्यय/ विदेश में अध्ययन हेतु यात्रा व्यय/अन्य व्यय जो पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए आवश्यक है जैसे अध्ययन यात्राएं/परियोजना कार्य,शोधकार्य आदि।

वित्त पोषण जो व्यय पात्र नही हैः कॉशन डिपाजिट/भवन निधि/वापसी योग्य निधि।
   
3. मार्जिन
 
रू. 4 लाख तक शून्य  
रू. 4 लाख से अधिक भारत में अध्ययन हेतु :   5%
  विदेश में अध्ययन हेतु :  15%
  छात्रवृत्ति/सहायता को मार्जिन में सम्मिलित करना चाहिए।
जब भी यथानुपात आधार पर संवितरण किया जाए, वर्ष दर वर्ष के आधार पर मार्जिन निश्चित की जानी चाहिए।
   
4. प्रतिभूतिः
 
अध्ययनरत

प्रतिभूति रहित

(क)

तीसरे पक्ष की गारंटी और/या संपार्श्विक

(ख)

संपार्श्विक और तीसरे पक्ष की गारंटी

(ग)

भारत रू. 4 लाख तक रू. 4 लाख से अधिक और रू. 7.50 लाख तक रू. 7.50 लाख से अधिक
विदेश रू. 4 लाख तक रू. 4 लाख से अधिक और रू. 7.50 लाख तक रू. 7.50 लाख से अधिक
 
  • किश्तों की अदायगी हेतु छात्र की भविष्य की आय का समनुदेशन
  • छात्र एवं माता-पिता/अभिभावक द्वारा सह-ऋणी के रूप में ऋण प्रलेखों का निष्पादन किया जाना चाहिए।
  • छात्र/माता-पिता/अभिभावक या अन्य किसी तीसरे के नाम में जमीन/भवन/सरकारी प्रतिभूतियों/ सरकारी उपक्रम बांडों/यूटीआई कीयूनिटों, एनएससी, किसान विकास पत्र,एलआईसी पॉलिसी, सोना, शेयरों/डिबेंचरों, बैंक जमाओं के रूप में संपार्श्विक प्रतिभूति व्यावहारिक मार्जिन हो सकती हैं।
  • जहाँ कही जमीन/भवन पहले से ही बंधक है, भार-रहित हिस्से को दूसरे चार्ज के आधार पर प्रतिभूति के रूप में लिया जा सकता है बशर्ते यह ऋण राशि को कवर करती है।
  • यदि कंप्यूटर, लैपटॉप, मेडिकल या इंजीनियरिंग उपकरणों आदि को क्रय करने के लिए ऋण दिया जाता है तो इनका बंधीकरण बैंक के नाम में किया जाना चाहिए।
   
5 बीमाः समूह बीमा योजना के अंतर्गत, बैंक ने बजाज लाईफ इंश्योरेंश कंपनी लि. के साथ शिक्षा ऋण ऋणियों को मूल्य के साथ लाभ और कम लागत पर जीवन बीमा प्रदान करने हेतु समझौता किया है।
   
6. ब्याज दरः
   
 
श्रेणी रू. 4 लाख तक रू. 4 लाख से अधिक और रू. 10 लाख तक रू. 10 लाख से अधिक और रू. 20 लाख तक
जन साधारण बीपीएलआर (-) 1.00% बीपीएलआर (-) 0.50% बीपीएलआर
ब्याज में छूट 0.50%, यदि संपार्श्विक या गारंटी दी जाती है। 0.50% यदि संपार्श्विक के साथ गारंटी भी दी जाती है। कोई छूट नही
   
  सभी ऋणियों को 2% की अतिरिक्त छूट यदि अधिस्थगन अवधि में ब्याज का भुगतान किया जाता है। अधिस्थगन अवधि/भुगतान अवधि में साधारण ब्याज लगाया जाएगा।
   
  उपरोक्त ब्याज दर ढ़ाचे में छात्राओं हेतु 0.50% की अतिरिक्त छूट।
   
  छात्रों के लिए निम्नतम दर 11.25% और छात्राओं हेतु 10.75% होगी।
   
7. प्रसंस्करण शुल्कः ऋणियों को प्रसंस्करण शुल्क हेतु रू. 1000/- (भारत में पाठ्यक्रमों के लिए) और रू. 2000/- (विदेशों में अध्ययन हेतु) बचत खातें (आरक्षित में रखने के लिए) में जमा कराने होंगे। ऋण के संपूर्ण संवितरण के बाद ही, ऋणी को इसके आहरण की स्वीकृति दी जानी चाहिए। अन्यथा इसको प्रसंस्करण शुल्क के रूप में वसूल कर लिया जाएगा।
   
8. पुनर्भुगतान अनुसूचीः
 

भुगतान अवकाश/अधिस्थगन अवधिः पाठ्क्रम अवधि + छः महीने या एक वर्ष तथा रोजगार प्राप्त होने के पश्चात् जो भी पहले हो। ऋण की अदायगी, भुगतान आरंभ रोजगार प्राप्त होने के बाद 5 से 7 वर्ष में हो जानी चाहिए। यदि छात्र निर्धारित समय में पाठ्यक्रम को पूरा नही कर पाता है तो पाठ्यक्रम को पूरा करने की अवधि को अधिकतम 2 वर्ष हेतु बढ़ाने की स्वीकृति दी जा सकती है। यदि छात्र अपनी शक्ति से बाहर के कारणों की वजह से पाठ्यक्रम को पूरा करने में असमर्थ है तो संस्वीकृति प्राधिकारी, अपने विवेकानुसार जैसा वो आवश्यक समझता है, पाठ्यक्रम की अवधि में बढ़ोत्तरी कर सकता है।

पुनर्भुगतान अवकाश के दौरान उपचित ब्याज को मूल राशि में जोड़कर, मासिक अदायगी की किश्तों (ईएमआई) का निर्धारण करें।

   
9. वहुविध ऋणः
   
(क) आंचलिक प्रबंधकों को प्राधिकृत किया गया है कि वो छात्रों को मामले दर मामले के आधार पर द्वितीय ऋण/अतिरिक्त शिक्षा ऋण की स्वीकृति निम्न आधार पर दे सकते हैं-
 
  • ऋणी और सह-ऋणी की चुकौती क्षमता से मूल्यांकन/संस्वीकृति प्राधिकारी को संतुष्ट होना चाहिए।
  • ऋणी और सह-ऋणी द्वारा ऋण को सुरक्षित करने हेतु पर्याप्त संपार्श्विक प्रतिभूति प्रस्तावित करनी होगी।
  • दूसरे ऋण की अवधि 3 वर्ष से अधिक नही होनी चाहिए।
  • प्रथम ऋण को पूरा करने के लिए प्रथम ऋण में ब्याज नियमित आधार पर दिया जाना चाहिए।
  • छात्र/ऋणी के संपूर्ण मूल्यांकन करने के बाद ही दूसरा ऋण देना चाहिए और शिक्षा ऋण के वर्तमान दिशानिर्देशानुसार दिया जाना चाहिए।
  • दोनों ऋणों में अदायगी दूसरे चरण के पूरा होने के बाद आरंभ होनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि दूसरे चरण के पूरा होने के बाद, संमिश्र ऋण की अदायगी 5 वर्ष के अंदर होनी चाहिए।
  • प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम के प्रवेश के पुष्टिकरण के बाद ही, यह सुविधा एक अतिरिक्त ऋण हेतु उपलब्ध होगी। छात्र दो अध्ययन ऋण ले सकता है यदि उनमें से एक ऋण विदेश में अध्ययन हेतु है। शिक्षा ऋण, किसी भी एक समय में, दो से अधिक नही हो सकते हैं।
  • ऋणी की प्रार्थना पर और ऋणी/सह-ऋणी की अदायगी की क्षमता के अनुसार, प्रथम ऋण को द्वितीय ऋण के साथ भुगतान के लिए 5 से 7 वर्ष के अंदर, अदायगी के आरंभ होने के बाद पुनर्निधारित किया जा सकता है।
(ख). यदि माता-पिता द्वितीय ऋण/एक से अधिक बच्चों के लिए ऋण लेना चाहते हैं तो वहुविध ऋण हेतु परिवार को एक इकाई के रूप में माना जाएगा। कुल संस्वीकृत ऋण राशि के अनुसार ही प्रतिभूती लेनी होगी और माता-पिता/छात्र(ओं) की चुकौती क्षमता तथा निर्धारित मार्जिन के अनुसार ऋण प्रदान किया जाएगा।
 
(i) संस्वीकृति प्राधिकारी को पहले बच्चे के अध्ययन के दौरान ब्याज प्राप्त करने के विकल्प को खोजना चाहिए और जब तक बच्चा नौकरी नही शुरू करता माता-पिता की दोनों ऋणों पर ब्याज देने की क्षमता को सुनिश्चित करना चाहिए।
(ii) दूसरे ऋण मामले में पहला बच्चा और पहले ऋण मामले में दूसरा बच्चा गारंटर होना चाहिए।
   
10. ऑन-लाइन आवेदन प्रस्तुत करनाःबैंक ने शिक्षा ऋण आवेदनों को प्रस्तुत करने के लिए ऑन-लाइन सुविधा प्रस्तुत की है। ऑन-लाइन प्रणाली स्वतः ही एक विशिष्ट संदर्भ संख्या उत्पन्न करती है जिसका प्रयोग आवेदक के साथ भविष्य में किए गए सभी पत्राचार में करना चाहिए। यह अपेक्षित है कि ऐसे सभी ऑन-लाइन आवेदन जो पात्रता मानदंडों को पूरा करते है, को सही प्रकार से रिकार्ड किया जाए और शिक्षा ऋण नीति के अनुसार तथा आवेदक द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण की पुष्टि बाद और बैंक के नियमित ऋण संबंधी मानदंडों के अनुपालन-अनुसार, सुविधाजनक नजदीकी शाखा के माध्यम से इसका निस्तारण किया जाए।
   
11. मूल्यांकन/संस्वीकृति/संवितरण
 
  • सामान्य तौर पर, ऋण का मूल्यांकन करते समय, छात्र की भविष्य की संभावित आय को ध्यान में रखा जाए। फिर भी, जहाँ भी आवश्यक हो, चुकौती क्षमता को निर्धारित करने के लिए माता-पिता/अभिभावक की आय को ध्यान में रखा जाए।
  • ऋण की संस्वीकृति निहित अधिकारों के अनुसार की जाए और छात्र/माता-पिता के निवास स्थान की नजदीकी शाखा से की जाए।
  • किसी भी शिक्षा ऋण के आवेदन को अपने से उच्च स्तर के अधिकारी की स्वीकृति के बगैर निरस्त न किया जाए।
  • आवश्यकता/मांग के अनुसार, जहां तक संभव हो सके ऋण का संवितरण सीधे तौर पर संस्थाओं/किताबों केबिक्रेताओं/उपकरणों/यंत्रों के लिए, कई स्तरों पर किया जाए।
   

 




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